प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषितम साझा करते हुए प्रगति के लिए सक्रिय रहने के महत्व पर जोर दिया

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा करते हुए जीवन में निरंतर सक्रिय रहने और प्रगति की ओर अग्रसर रहने का संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि जैसे सूर्य निरंतर गतिशील रहकर प्रकाश और ऊर्जा प्रदान करता है, उसी प्रकार मनुष्य को भी निरंतर कर्मरत रहना चाहिए।

उन्होंने जो सुभाषितम् साझा किया, वह इस प्रकार है—

“चरन् वै मधु विन्दति चरन् स्वादुमुम्बरम्
सूर्यस्य पश्य श्रेमाणं यो न तन्द्रयते चरंश्चरैवेति॥”

इसका अर्थ है कि जो व्यक्ति निरंतर आगे बढ़ता रहता है, प्रयास करता रहता है, वही जीवन में श्रेष्ठ फल प्राप्त करता है। जैसे सदा गतिशील सूर्य ही यश और सम्मान प्राप्त करता है, वैसे ही मनुष्य को भी आलस्य त्यागकर सक्रिय रहना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि आज से प्रारंभ हुई पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना भगवान सूर्य की ऊर्जा से प्रेरित है। यह योजना देशवासियों को स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है तथा उनके जीवन में ऊर्जा और उत्साह का संचार कर रही है।

प्रधानमंत्री ने यह संदेश सोशल मीडिया मंच X पर साझा करते हुए नागरिकों से सकारात्मक ऊर्जा और निरंतर कर्म के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।