अवसंरचना और उत्पादन क्षमताओं में वृद्धि

केंद्र सरकार वस्त्र और परिधान निर्यात को बढ़ावा देने में लगे विभिन्न निर्यात संवर्धन परिषदों और व्यापार निकायों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर व्यापार मेलों, प्रदर्शनियों, क्रेता-विक्रेता बैठकों आदि के आयोजन और उनमें हिस्सा लेने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है।

मंत्रालय ने भारतीय वस्त्र मूल्य श्रृंखला की ताकत को प्रदर्शित करने, वस्त्र एवं फैशन उद्योग में नवीनतम प्रगति/नवाचारों को उजागर करने तथा वस्त्र क्षेत्र में सोर्सिंग और निवेश के लिए भारत को सबसे पसंदीदा गंतव्य के रूप में स्थापित करने हेतु एक वैश्विक मेगा वस्त्र कार्यक्रम अर्थात भारत टेक्स 2025 के आयोजन में निर्यात संवर्धन परिषदों/संघों को सहयोग दिया है।

सरकार शून्य-रेटेड निर्यात के सिद्धांत को अपनाकर प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए परिधान/वस्त्र और मेड-अप्स के लिए राज्य एवं केंद्रीय करों एवं शुल्कों में छूट (आरओएससीटीएल) योजना भी लागू कर रही है। इसके अलावा, आरओएससीटीएल योजना के अंतर्गत शामिल न होने वाले वस्त्र उत्पादों को अन्य उत्पादों के साथ निर्यातित उत्पादों पर शुल्कों एवं करों में छूट (आरओडीटीईपी) के अंतर्गत शामिल किया गया है।

सरकार देश के वस्त्र क्षेत्र को बढ़ावा देने और इसकी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए विभिन्न योजनाओं/पहलों को लागू कर रही है। प्रमुख योजनाओं/पहलों में आधुनिक, एकीकृत, विश्व स्तरीय प्लग एंड प्ले टेक्सटाइल अवसंरचना के निर्माण हेतु प्रधानमंत्री मेगा एकीकृत वस्त्र क्षेत्र एवं परिधान (पीएम मित्र) पार्क योजना; बड़े पैमाने पर विनिर्माण को बढ़ावा देने और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने हेतु एमएमएफ फैब्रिक, एमएमएफ परिधान और तकनीकी वस्त्रों पर केंद्रित उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना; अनुसंधान, नवाचार एवं विकास, संवर्धन और बाजार विकास पर केंद्रित राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन; मांग-संचालित, नियोजन-उन्मुख, कौशल विकास कार्यक्रम प्रदान करने के उद्देश्य से वस्त्र क्षेत्र में क्षमता निर्माण हेतु समर्थ योजना (एसएएमएआरटीएच) शामिल है। इसके अलावा, राष्ट्रीय हस्तशिल्प/हथकरघा विकास कार्यक्रम के अंतर्गत हस्तशिल्प और हथकरघा क्षेत्र को प्रत्यक्ष सहायता प्रदान की जाती है।

केन्द्रीय वस्त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह ने यह जानकारी आज लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।