अमरनाथ यात्रा असमंजस में यात्री; हमले के बावजूद उत्साह जारी रखने की अपील
अमरनाथ यात्रा, जो हर साल जुलाई से अगस्त तक आयोजित होती है, देशभर के लाखों तीर्थयात्रियों के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन है। हालांकि, इस साल आतंकी हमले की वजह से तीर्थयात्रियों के बीच सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता है, जिसके कारण कई लोग यात्रा पर जाने से हिचकिचा रहे हैं या अपनी यात्रा रद्द कर रहे हैं।
सुरक्षा स्थिति और यात्रा पर असर
अमरनाथ यात्रा का मुख्य मार्ग पहलगाम से चंदनवाड़ी होते हुए जाता है, जो एक 35 किलोमीटर लंबी यात्रा है। इस मार्ग पर विभिन्न आधार शिविर बनाए जाते हैं, जहां तीर्थयात्रियों के ठहरने और विश्राम करने की व्यवस्था की जाती है। लेकिन हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम इलाके में हुए आतंकी हमले ने यात्रा की सुरक्षा पर सवाल उठा दिए हैं। इन हमलों के कारण यह मार्ग अब अत्यंत संवेदनशील हो गया है और तीर्थयात्रियों के मन में डर का माहौल बना हुआ है।
केंद्र सरकार और सुरक्षा बलों ने तीर्थयात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष उपाय किए हैं। हालांकि, हालात को देखते हुए यात्रा पर जाने वाले यात्रियों की संख्या में गिरावट आ रही है। अनुमान है कि 50 प्रतिशत तत्त शहरों में लोग इस हमले के " रद्द हो सकती है। सूरत जैसे की योजना बदलने या रद्द करने का विचार कर रहे हैं। कइरवारों ने अपनी यात्रा स्थगित कर दी है और वे कहे रहे है की अगले साल यात्रा जाने का फैसला करेंगे।
तीर्थयात्रियों ने अभी तक यात्रा पर जाने का निर्णय लिया है, वे अपने परिवार के सदस्यों की चिंता से जूझ रहे हैं। जैसे सूरत के मोराभागल इलाके के लोग, जिन्होंने 9 जुलाई को अमरनाथ यात्रा पर जाने की योजना बनाई थी, अब वे आतंकवादी हमले के कारण संशय में हैं। यात्रा के लिए उन्होंने अपनी बुकिंग भी करा ली थी और फिटनेस प्रमाण पत्र भी प्राप्त कर लिया था, लेकिन उनके परिवार ने उन्हें यात्रा से दूर रहने की सलाह दी है। परिवार का मानना है कि वर्तमान स्थिति को देखते हुए यात्रा करना सुरक्षित नहीं है और भगवान उन्हें बाद में बुलाएंगे।
वहीं, खटोदरा क्षेत्र के पटेल परिवार ने भी बालटाल मार्ग से यात्रा करने का निर्णय स्थगित कर दिया है। वे कह रहे हैं कि इस बार यात्रा पर जाना सुरक्षित नहीं होगा, लेकिन यदि अगले साल स्थिति बेहतर होती है, तो वे तीर्थयात्रा करेंगे।
यात्रा के समर्थन में आवाजें
हालांकि, कुछ लोग इस परिस्थिति से घबराए नहीं हैं और वे यात्रा करने का फैसला कर चुके हैं। जगदीशभाई मेर, जो पिछले 14 वर्षों से अमरनाथ यात्रा पर जा रहे हैं, का कहना है कि आतंकवादी हमले के बावजूद लोग यात्रा करने से नहीं डरें। वे कहते हैं कि सुरक्षा बलों की पूरी कोशिश रहेगी कि यात्रियों को कोई खतरा न हो। वे यह भी मानते हैं कि हम भारत में रहते हैं और हमें अपने धार्मिक कर्तव्यों को निभाने से नहीं डरना चाहिए। उनका कहना है कि भारत सरकार और भारतीय सेना आतंकवादियों को मुंहतोड़ जवाब देंगे और ऐसी घटनाओं ने के लिए ठोस कदम उठाएंगे।
इसी तरह, सुनीता देवड़ा, जो पहली बार अमरनाथ यात्रा पर जाने वाली हैं, कहती हैं कि उन्होंने पहले ही तय किया था कि उन्हें यात्रा करनी है और वे इस डर के कारण अपनी योजना रद्द नहीं करेंगी। वे यह भी कहती हैं कि भारतीय सेना ने यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की है, और यह हमें अपने कर्तव्यों को निभाने से नहीं रोक सकती। वे देशवासियों से अपील करती हैं कि वे इस यात्रा को एक धार्मिक कर्तव्य के रूप में देखें और आतंकवादियों से डरकर अपनी योजनाओं को न बदलें।
यात्रा उद्योग पर असर
अमरनाथ यात्रा सिर्फ तीर्थयात्रियों के लिए ही नहीं, बल्कि पर्यटन और यात्रा उद्योग के लिए भी एक बड़ा आयोजन है। हालांकि, आतंकी हमलों के बाद यात्रा उद्योग पर भी बुरा असर पड़ा है। ट्रैवल एजेंट्स और टूर ऑपरेटरों का कहना है कि अब तक की गई बुकिंग्स में से करीब 60 फीसदी ने अपनी यात्रा रद्द करने के लिए उनसे संपर्क किया है। यह आंकड़ा यात्रा पर जाने वाले यात्रियों के बीच भय को दर्शाता है।
सूरत के सिविल अस्पताल में भी 2800 से अधिक लोगों ने फिटनेस प्रमाण पत्र के लिए पंजीकरण कराया है, जो इस बात का संकेत है कि इस वर्ष पहले की तुलना में अधिक लोग अमरनाथ यात्रा पर जाने के लिए इच्छुक थे। लेकिन आतंकी हमलों के बाद यात्रा पर जाने के फैसले में उलझन और बदलाव देखा जा रहा है।
हालांकि, कई लोग डर के बावजूद यात्रा करने का संकल्प ले रहे हैं, उनका सरकार और सुरक्षा बलों पर पूरा भरोसा है। वे मानते हैं कि भारतीय सेना और मोदी सरकार इस स्थिति को नियंत्रित करने में सक्षम हैं और आतंकवादियों को कड़ा जवाब देंगे। लोगों का यह भी कहना है कि हमें अपने धार्मिक अधिकारों का पालन करना चाहिए और आतंकवादियों के डर से अपनी यात्रा स्थगित नहीं करनी चाहिए।
सरकार और सुरक्षा एजेंसियां इस स्थिति को कैसे संभालती हैं और तीर्थयात्रियों में विश्वास बहाल करती हैं। फिलहाल, अधिकांश लोग यात्रा रद्द करने का विकल्प चुन रहे हैं, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इस मुश्किल समय में भी अपनी धार्मिक यात्रा पूरी करने का संकल्प ले चुके हैं।