जामा मस्जिद के शाही इमाम का बयान: इन्सानियत के ख़िलाफ़ जुर्म की निंदा
हाल ही में पहलगाम में हुए अमानवीय और कायरतापूर्ण हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस हमले में बेगुनाहों की जान गई, और पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई। इस नृशंस कृत्य की केवल भारत में ही नहीं, बल्कि दुनियाभर में कड़ी आलोचना हो रही है।
दिल्ली की ऐतिहासिक जामा मस्जिद के शाही इमाम, सय्यद अहमद बुखारी साहब ने भी इस हमले की घोर निंदा की है। उन्होंने कहा कि, “बेगुनाहों की जान लेना कोई भी धर्म नहीं सिखाता। जो लोग मजहब के नाम पर खून बहा रहे हैं, वे ना केवल अपने धर्म का अपमान कर रहे हैं, बल्कि इन्सानियत के खिलाफ भी सबसे बड़ा गुनाह कर रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि यह हमला न केवल एक समुदाय पर हमला है, बल्कि मानवता के मूल्यों पर सीधा प्रहार है। मजहब का नाम लेकर की गई हिंसा हर उस सिद्धांत के खिलाफ है, जिसकी नींव शांति, प्रेम और भाईचारे पर रखी गई है।
“हम इस जघन्य अपराध की कड़ी निंदा करते हैं,” शाही इमाम ने स्पष्ट शब्दों में कहा। “हम सरकार से मांग करते हैं कि जो भी लोग इस अपराध में शामिल हैं, उन्हें जल्द से जल्द पकड़कर कड़ी से कड़ी सजा दी जाए, ताकि ऐसा अपराध फिर दोहराया न जाए।”
उन्होंने आगे कहा कि आज का समय नफरत फैलाने का नहीं, बल्कि आपसी मोहब्बत और विश्वास को मज़बूत करने का है। आतंकवाद का कोई मजहब नहीं होता, और जो लोग मजहब की आड़ लेकर हिंसा फैलाते हैं, वे इंसान कहलाने के लायक नहीं हैं।
शाही इमाम का यह बयान एक स्पष्ट संदेश है कि समाज के सभी जिम्मेदार लोगों को आगे आकर ऐसे कृत्यों के खिलाफ एकजुट होकर आवाज़ उठानी चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियों को एक सुरक्षित और शांतिपूर्ण भविष्य मिल सके।