पहलगाम हमले के शहीदों को अंतिम विदाई, उमड़ा जनसैलाब; देश में उबाल, बदला लेने की भावना प्रबल
पहलगाम में हुए कायराना आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस नृशंस हमले में शहीद हुए लोगों को उनके-उनके गृह नगरों में नम आंखों से अंतिम विदाई दी गई। महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, राजस्थान, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में जनसैलाब उमड़ पड़ा। लोगों ने शहीदों को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि दी और उनके बलिदान को सलाम किया।
गुजरात की सरज़मीं पर अंतिम विदाई
भावनगर के सुधीरभाई परमार और उनके पुत्र यतिशभाई परमार को भावुक माहौल में अंतिम विदाई दी गई। सूरत में सुरेश भाई कलथिया के अंतिम संस्कार के दौरान 'शहीद अमर रहें' के नारे गूंजते रहे। हजारों की भीड़ ने नम आंखों से अंतिम यात्रा में हिस्सा लिया।

देशभर में शोक और आक्रोश
ओडिशा के प्रशांत सतपथी, आंध्र प्रदेश के मधुसूदन राव, पुणे के संतोष जगदाले, जयपुर के नीरज उधवानी, रायपुर के दिनेश मिरानिया और इंदौर के सुशील नथानियल को धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार किया गया। इन अंतिम संस्कारों में आम लोगों के साथ-साथ स्थानीय जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे।
आज पुणे के कौस्तुभ गणबोटे, कानपुर के शुभम द्विवेदी, बेंगलुरु के भारत भूषण और मंजूनाथ, तथा बिहार के मनीष रंजन का अंतिम संस्कार किया जाना है।
नेपाल से आए पर्यटक सुदीप न्यापाने के पार्थिव शरीर को स्थानीय सरकार ने उनके परिजनों को सौंपा।

हर आंख नम, हर दिल में आक्रोश
कुछ जगहों पर बेटियों ने अपने पिता को मुखाग्नि दी, तो कहीं बेटों ने कांपते हाथों से अंतिम संस्कार की रस्में निभाईं। अंतिम यात्रा में उमड़े जनसमूह में ग़म के साथ-साथ आक्रोश भी साफ देखा गया। 'पाकिस्तान मुर्दाबाद' के नारों के बीच लोगों की आंखों में आतंक के खिलाफ बदले की ज्वाला साफ झलक रही थी।
शहीदों को नमन, आतंकियों के लिए सख़्त संदेश
हर कोने से उठती एक ही आवाज़—अब और नहीं। देश की जनता अब सिर्फ शोक में नहीं डूबी, बल्कि एकजुट होकर यह संदेश दे रही है कि शहीदों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। आतंकियों को उनके किए की सजा जरूर मिलेगी।