प्रधानमंत्री ने चंद्रशेखर आजाद के बलिदान दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके जीवन से मिलने वाली शिक्षाओं को दर्शाने के लिए संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भारत माता के अमर क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद के बलिदान दिवस पर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आजाद ने मां भारती को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उनका त्याग और साहस उन्हें सदैव राष्ट्र की स्मृति में अमर बनाए रखेगा।
अमर क्रांतिकारी की विरासत को स्मरण करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद का जीवन हमें यह सिखाता है कि अन्याय के विरुद्ध अडिग रहना ही सच्चा पराक्रम है। मातृभूमि के लिए उनका बलिदान आने वाली हर पीढ़ी को राष्ट्रसेवा और साहस के लिए प्रेरित करता रहेगा।
प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर अपने संदेश में लिखा:
“भारत माता के वीर सपूत चंद्रशेखर आजाद के बलिदान दिवस पर उन्हें मेरी आदरपूर्ण श्रद्धांजलि। उन्होंने मां भारती को गुलामी की बेड़ियों से आजाद कराने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया, जिसके लिए वे सदैव स्मरणीय रहेंगे।
अमर क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद का जीवन बताता है कि अन्याय के खिलाफ अडिग रहने का संकल्प ही सच्चा पराक्रम है। मातृभूमि के लिए उनके बलिदान की गाथा देश की हर पीढ़ी को प्रेरित करती रहेगी।”
इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषितम् भी साझा किया:
न हि शौर्यात्परं किञ्चित् त्रिषु लोकेषु विद्यते।
शूरः सर्वं पालयति सर्वं शूरे प्रतिष्ठितम्॥
अर्थात — तीनों लोकों में शौर्य से श्रेष्ठ कोई तत्व नहीं है। शौर्य ही वह आधारभूत शक्ति है जो समस्त चराचर जगत का पोषण और संरक्षण करती है तथा मर्यादा, समृद्धि और कर्तव्य का आधार बनती है।