बढ़ती गर्मी के कारण बेल शरबत की मांग बढ़ी 

 

बढ़ती गर्मी के साथ ही बिल्व (बेल) और पान के पत्तों से बने शरबत की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है। ये शरबत न केवल स्वादिष्ट होते हैं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी हैं।

तापमान नियंत्रण और लू से बेल का शरबत शरीर को ठंडक प्रदान करता है और गर्मी में लू से बचाने में सहायक होता है।

 बेल में मौजूद टैनिन और पेक्टिन दस्त और पेचिश जैसी समस्याओं के इलाज में मदद करते हैं। रोग प्रतिरोधक क्षमता में बेल के फल में विटामिन सी, कैल्शियम, पोटैशियम और फाइबर जैसे पोषक तत्व होते हैं, जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करते हैं। 

बेल पाचन में सहायता और डायस्टेज नामक एंजाइम होता है, जो स्टार्च और कार्बोहाइड्रेट को पचाने में मदद करता है। गले के संक्रमण में राहत गर्म पानी में पान के पत्तों का रस मिलाकर गरारे करने से गले के संक्रमण और डिप्थीरिया में राहत मिलती है। बेल जूस मस्तिष्क में डोपामिन स्तर बढ़ता है, जिससे तनाव कम होता है और मूड बेहतर होता है।

सूरत में बेल से बने शरबत की मांग बढ़ने के कारण, बिहार, उत्तर प्रदेश और राजस्थान से विशेष बेल और पान के पत्ते मंगाए जा रहे हैं। आकार के बेल 30 से 40 रुपये में स्थानीय बाजार में छोटे उपलब्ध हैं, जबकि बड़े आकार के बेल, जो बाहर से मंगाए जाते हैं, लगभग 200 रुपये में बिकते हैं। एक गिलास बेल शरबत की कीमत 25 से 30 रुपये है, और गर्मियों में प्रतिदिन लगभग 70 गिलास बिक जाते हैं।