भारत-फ्रांस के बीच राफेल डील

 

भारत और फ्रांस के बीच हुए ऐतिहासिक रक्षा सौदे के बारे में, जिसने देश की सामरिक शक्ति को एक नई ऊंचाई दी है।

भारत ने फ्रांस के साथ 63 हजार करोड़ रुपए की सबसे बड़ी हथियार डील को अंतिम रूप दिया है। इस डील के तहत भारत फ्रांस से कुल 26 राफेल मरीन लड़ाकू विमान खरीदेगा। इनमें 22 सिंगल सीटर और 4 डबल सीटर विमान शामिल हैं।

इस ऐतिहासिक सौदे पर भारत की ओर से रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह ने आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर किए। गौरतलब है कि इस डील को 23 अप्रैल को हुई कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की बैठक में स्वीकृति दी गई थी।

अब सवाल उठता है कि ये राफेल मरीन विमान आखिर इतने महत्वपूर्ण क्यों हैं?

तो आइये जानते हैं राफेल विमानों की कुछ बेहतरीन खूबियाँ -

ये विमान 50,000 फीट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकते हैं।

राफेल मरीन विमान न केवल परमाणु हमले करने में सक्षम हैं, बल्कि एंटी-शिप स्ट्राइक जैसे जटिल अभियानों को भी अंजाम दे सकते हैं।

एडवांस्ड रडार तकनीक से लैस इन विमानों को टेकऑफ और लैंडिंग के लिए बेहद कम जगह की आवश्यकता होती है, जो इन्हें एयरक्राफ्ट कैरियर जैसे सीमित जगहों पर संचालन के लिए आदर्श बनाता है।

एक राफेल विमान लगभग 9 टन तक के हथियार ले जाने में सक्षम है, जो इसे बहुउद्देश्यीय ऑपरेशन में सक्षम बनाता है।

लगातार 10 घंटे तक उड़ान भरते हुए फ्लाइट डेटा की रिकॉर्डिंग कर सकते हैं, जिससे मिशन की समीक्षा और विश्लेषण और अधिक सटीक हो जाता है।

इन विमानों की ऑपरेशनल रेंज लगभग 3700 किलोमीटर है और यह 2200 किलोमीटर प्रति घंटे की जबरदस्त गति से उड़ सकते हैं।


सबसे अहम बात यह है कि ये राफेल मरीन विमान भारत के स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत पर तैनात किए जाएंगे। INS विक्रांत भारतीय नौसेना का गौरव है और अब राफेल जैसे आधुनिक विमानों की मौजूदगी इसकी शक्ति को कई गुना बढ़ा देगी।

रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, इस सौदे से भारत की समुद्री सीमाओं की रक्षा क्षमता में जबरदस्त इजाफा होगा। चीन और अन्य शत्रु देशों के बढ़ते समुद्री प्रभाव को ध्यान में रखते हुए यह डील सामरिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

2028-29 से भारत को इन विमानों की डिलीवरी शुरू हो जाएगी, जिससे भारतीय नौसेना की ताकत में एक नया अध्याय जुड़ जाएग