भारी उद्योग मंत्रालय ने रेयर अर्थ मैग्नेट निर्माण के लिए वैश्विक निविदा जारी की
भारत सरकार के Ministry of Heavy Industries ने देश में सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (REPM) के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मंत्रालय ने 6,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष क्षमता वाले एकीकृत सिंटर्ड NdFeB रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट विनिर्माण संयंत्रों की स्थापना के लिए लाभार्थियों के चयन हेतु वैश्विक निविदा (RFP) जारी की है।
इस निविदा प्रक्रिया के तहत इच्छुक कंपनियां भारत में आधुनिक विनिर्माण संयंत्र स्थापित करने के लिए आवेदन कर सकती हैं और सरकार द्वारा दी जाने वाली पूंजीगत सब्सिडी तथा बिक्री-संबंधी प्रोत्साहनों का लाभ प्राप्त कर सकती हैं।
पारदर्शी ऑनलाइन निविदा प्रक्रिया
निविदा प्रक्रिया Central Public Procurement Portal (CPP Portal) के माध्यम से पूरी तरह ऑनलाइन संचालित की जाएगी। यह प्रक्रिया दो चरणों में होगी:
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तकनीकी बोली
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वित्तीय बोली
इसमें न्यूनतम लागत प्रणाली (LCS) का उपयोग किया जाएगा ताकि पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके।
महत्वपूर्ण तिथियां
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निविदा दस्तावेज उपलब्ध: 20 मार्च 2026
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बोली-पूर्व सम्मेलन: 7 अप्रैल 2026
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बोली जमा करने की अंतिम तिथि: 28 मई 2026
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तकनीकी बोलियां खुलने की तिथि: 29 मई 2026
7,280 करोड़ रुपये की योजना
इस योजना को Narendra Modi की अध्यक्षता में 26 नवंबर 2025 को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी दी गई थी। इसके लिए कुल 7,280 करोड़ रुपये का वित्तीय परिव्यय निर्धारित किया गया है।
योजना के तहत:
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750 करोड़ रुपये की पूंजीगत सब्सिडी
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6,450 करोड़ रुपये का बिक्री-संबंधी प्रोत्साहन
प्रदान किया जाएगा।
प्रत्येक लाभार्थी को 600 से 1,200 मीट्रिक टन प्रति वर्ष की क्षमता (100 एमटीपीए के गुणकों में) आवंटित की जाएगी।
आईआरईएल से कच्चे माल की आपूर्ति
योजना के अंतर्गत सबसे कम बोली लगाने वाले तीन आवेदकों को IREL (India) Limited से NdPr ऑक्साइड की सीमित आपूर्ति भी उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे उत्पादन शुरू करने में सहायता मिलेगी।
कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उपयोग
रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट दुनिया के सबसे शक्तिशाली चुंबकों में शामिल हैं। इनका उपयोग कई उन्नत क्षेत्रों में होता है, जैसे:
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इलेक्ट्रिक वाहन
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पवन ऊर्जा टर्बाइन
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आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स
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एयरोस्पेस
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रक्षा प्रणालियां
सरकार का उद्देश्य NdPr ऑक्साइड से लेकर तैयार मैग्नेट तक पूरी वैल्यू चेन को भारत में विकसित करना है, जिससे आयात पर निर्भरता कम होगी और भारत वैश्विक रेयर अर्थ मैग्नेट बाजार में मजबूत भूमिका निभा सकेगा।