राष्ट्रीय मात्स्यिकी विकास बोर्ड
राष्ट्रीय मात्स्यिकी विकास बोर्ड (एनएफ़डीबी) ने भारत सरकार की विभिन्न योजनाओं जैसे प्रधान मंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई), प्रधान मंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (पीएम-एमकेएसएसवाई), फिशरीस एंड एक्वाकल्चर इनफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फ़ंड (एफआईडीएफ) और किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के तहत देश में मात्स्यिकी को बढ़ावा देने के लिए कई पहलें शुरू की हैं। इनमें परियोजना प्रस्तावों का मूल्यांकन और अनुशंसा, स्वीकृत परियोजनाओं की निगरानी, प्रस्तावों/राज्य कार्य योजना की तैयारी के लिए राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को सहायता प्रदान करना और पीएमएमएसवाई की प्रबंधन सूचना प्रणाली को अद्यतन करना शामिल है। एनएफडीबी द्वारा उद्यमी मॉडल, बीमा योजनाएं (ग्रुप एक्सीडेंट्स इंश्योरेंस स्कीम (जीएआईएस), एक्वाक्रॉप इंश्योरेंस और फिशिंग वेस्सल इंश्योरेंस), और मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों/कंपनियों का गठन/सशक्तिकरण आदि जैसे प्रमुख हस्तक्षेपों का भी कार्यान्वयन किया जाता है। इसके अलावा, एनएफडीबी रिवर रैंचिंग, सी रैंचिंग, नवाचार और अभिनव परियोजनाओं, प्रौद्योगिकी प्रदर्शन और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों पर पायलट परियोजनाओं के लिए नोडल एजेंसी के रूप में भी कार्य करता है। इसके अलावा, एनएफडीबी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ समन्वय में मात्स्यिकी सहकारी समितियों के गठन/सशक्तिकरण, मात्स्यिकी समूहों के विकास और आउटरीच/जागरूकता कार्यक्रमों को भी सुगम बनाता है।
(ख): एनएफडीबी, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय/राज्य शैक्षणिक, प्रशिक्षण और अनुसंधान संस्थानों, जिनमें भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) संस्थान, विश्वविद्यालय/कॉलेज, मात्स्यिकी अनुसंधान स्टेशन, कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), एक्वा वन केंद्र (एओसी) और सूचीबद्ध फर्म/एजेंसियां शामिल हैं, के सहयोग से प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण को सपोर्ट करता है। आज तक 3,12,717 प्रतिभागियों (मछुआरे, मत्स्य कृषक, युवा और एससीएसपी लाभार्थियों सहित) को कवर किया गया है। इसके अलावा, आधुनिक, टिकाऊ और परिणामोन्मुखी मत्स्यपालन प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए आईसीएआर, एनएफडीबी और संबद्ध संगठनों के बीच समन्वय के माध्यम से एक राष्ट्रीय प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और एक्सपोजर विसिट कैलेंडर विकसित किया गया है। यह कैलेंडर 10 जुलाई 2025 को राष्ट्रीय मत्स्य कृषक दिवस पर जारी किया गया था।
(ग): एनएफडीबी ने प्रशिक्षण कार्यक्रम और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के मत्स्यपालन विभागों के अधिकारियों/प्रतिनिधियों के लिए आईसीएआर मात्स्यिकी संस्थानों में एक्सपोजर विजिट को सपोर्ट किया । इस संबंध में, कुल 129 कार्यक्रमों को स्वीकृति दी गई है, जिनका वित्तीय परिव्यय 122.55 लाख रपए है, जिससे 1290 लाभार्थियों को लाभ होगा। इसके अलावा, एनएफडीबी ने अनुमोदित योजना/लक्ष्य के अनुसार प्रशिक्षण कार्यक्रम कैलेंडर को पूरा करने का भी लक्ष्य रखा है, जिसका विवरण अनुबंध -I के में संलग्न है।
(घ): मत्स्यपालन विभाग, मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय ने 11.09.2024 को पीएम-एमकेएसएसवाई के तहत नेशनल फिशरीस डिजिटल प्लेटफॉर्म (NFDP) लॉन्च किया ताकि कार्य-आधारित डिजिटल पहचान और हितधारक डेटाबेस के निर्माण के माध्यम से मात्स्यिकी क्षेत्र को औपचारिक रूप दिया जा सके। एनएफडीपी संस्थागत ऋण तक पहुंच, मात्स्यिकी सहकारी समितियों को सशक्त करने, मात्स्यिकी बीमा को प्रोत्साहित करने, निष्पादन-आधारित प्रोत्साहन, फिशरीस ट्रेसेबिलिटी सिस्टम्स और प्रशिक्षण/क्षमता निर्माण के लिए "वन-स्टॉप" सोल्यूशन के रूप में कार्य करता है। अब तक, 29.61 लाख मछुआरे, मत्स्य कृषक और अन्य हितधारक एन.एफ.डी.पी. पर पंजीकृत हो चुके हैं। 52.93 करोड़ रुपए की लागत से 2786 प्राथमिक मत्स्य सहकारी समितियों को सशक्त करने हेतु स्वीकृति दी गई है। जलकृषि बीमा के तहत 491.30 हेक्टेयर को बीमा पॉलिसी में कवर किया गया है जिसके अंतर्गत 98.56 हेक्टेयर की कवरेज के साथ 29 लाभार्थियों ने एकमुश्त प्रोत्साहन [वन टाईम इनसेनटिव (ओ.टी.आई.)] का लाभ प्रदान किया गया है। इसके अलावा, क्रेडिट मॉड्यूल के तहत, बैंकों द्वारा 15.52 करोड़ रुपए की ऋण राशि के साथ 327 ऋण स्वीकृत किए गए हैं।
(ड): पीएमएमएसवाई के अंतर्गत 100 तटीय मछुआरा गांवों को जलवायु अनुकूल तटीय मछुआरा गांवों [क्लाईमेट रेसीलिएंट कोलस्टल फिशरमैन विलेजस (CRCFV) के रूप में विकसित किए जाने हेतु सहायता प्रदान की गई है । इसमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल किया गया है। इस योजना को पीएमएमएसवाई के केंद्रीय क्षेत्र योजना (सीएस) घटक के तहत 100% वित्त पोषित किया गया है, जिसमें आवश्यक मात्स्यिकी संबंधी सुविधाओं के लिए प्रति गांव 2 करोड़ रुपए का आवंटन है। इस पहल का उद्देश्य स्थायी आय और आजीविका के अवसर पैदा करना, फिशरीस इनफ्रास्ट्रक्चर का विकास करना, पर्यावरण अनुकूल प्रथाओं को बढ़ावा देना, मछुआरों के लिए सुरक्षा और संरक्षा सुनिश्चित करना, जलवायु अनुकूलन क्षमता निर्मित करना और इन गांवों की आर्थिक जीवंतता बढ़ाने की दिशा में उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना है। गाँव के चयन मानदंड में नदी/झील के मुहाने सहित तटरेखा से निकटता शामिल है। तटरेखा से 0-5 किमी के भीतर स्थित गांवों को प्राथमिकता दी जाती है, इसके बाद 0-10 किमी (0-5 किमी में कार्य सम्पूर्ण होने के बाद) और 0-20 किमी (0-10 किमी में कार्य सम्पूर्ण होने के बाद के बाद)।
(च): मत्स्य सेवा केंद्र ,पीएमएमएसवाई के तहत सहायता प्रदान किया जाने वाला एक विस्तार सेवा केंद्र है जो स्थानीय स्तर पर मछुआरों एवं मत्स्य कृषकों को तकनीकी, परामर्शी तथा क्षमता निर्माण से संबंधित सेवाएँ उपलब्ध कराने हेतु वन-स्टॉप सोल्यूशन सेंटर के रूप में कार्य करता है।
अनुबंध-I
जो राष्ट्रीय मात्स्यिकी विकास बोर्ड (NFDB) द्वारा मात्स्यिकी संस्थानों हेतु संचालित किए जा रहे प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रमों से संबंधित है।
|
संगठन |
कार्यक्रम का प्रकार |
वर्ष |
कार्यक्रमों की संख्या |
लाभार्थियों की संख्या |
|
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) |
क्षमता निर्माण कार्यक्रम |
2025-27 |
295 |
- |
|
ICAR-ATARI |
एनएफडीबी प्रायोजित किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम |
2025-27 |
160 |
4675 |
|
ASCI |
एनएफडीबी प्रायोजित एससी और एसटी आरपीएल |
2025-27 |
173 |
5200 |
|
राज्य मात्स्यिकी विभाग |
एनएफडीबी प्रायोजित एससी और एसटी आरपीएल |
2025-27 |
69 |
4650 |
|
राज्य मात्स्यिकी विभाग |
एनएफडीबी द्वारा प्रायोजित अनुसूचित जाति मछुआरे और मत्स्य किसान के लिए एक दिवसीय कार्यक्रम। |
2025-27 |
53 |
3000 |
|
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) |
एनएफडीबी प्रायोजित किसान एक्सपोजर विजिट |
2025-27 |
144 |
1440 |
|
केंद्रीय मत्स्य नौचालन एवं इंजीनियरी प्रशिक्षण संस्थान (CIFNET) |
-- |
2025-26 |
49 |
1800 |
|
भारतीय मात्स्यिकी सर्वेक्षण (FSI) |
-- |
2025-26 |
24 |
1200 |
|
राष्ट्रीय मात्स्यिकी पोस्ट हार्वेस्ट प्रौद्योगिकी एवं प्रशिक्षण संस्थान (NIFPHATT) |
-- |
2025-26 |
43 |
1002 |
|
केंद्रीय मात्स्यिकी तटवर्ती इंजीनियरी संस्थान (CICEF) |
-- |
2025-26 |
1 |
70 |
|
|
|
|
|
23037 |
यह जानकारी आज लोकसभा में मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री ,भारत सरकार श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने प्रश्न के उत्तर में दी।