सुप्रीम कोर्ट अपनी सीमा से बाहर जा रहा है: निशिकांत दुबे


देश की राजनीति और संवैधानिक संस्थाओं के बीच टकराव एक बार फिर चर्चा में है। इस बार बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने सुप्रीम कोर्ट पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति को तीन महीनों के भीतर निर्णय लेने का आदेश देना दुबे को नागवार गुज़रा।


निशिकांत दुबे ने कहा कि,"सुप्रीम कोर्ट अब अपनी सीमा से बाहर जाने लगा है। क्या अब देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद – राष्ट्रपति – को भी कोर्ट से आदेश लेना होगा? ये किस संविधान में लिखा है? कोर्ट ये भूल रही है कि राष्ट्रपति को नियुक्त करने वाले भी वो नहीं, बल्कि यही संविधान है, और वही संविधान उन्हें सर्वोच्च बनाता है।"

दुबे ने आगे कहा कि देश की कानून बनाने वाली संस्था संसद है। और संविधान में कहीं भी ऐसा प्रावधान नहीं है कि राष्ट्रपति को किसी फैसले के लिए समय-सीमा में बांधा जाए।

निशिकांत दुबे ने कहा कि, "हमारा संविधान राष्ट्रपति को कार्यपालिका का प्रमुख मानता है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का यह कहना कि राष्ट्रपति तीन महीने में फैसला लें, पूरी तरह असंवैधानिक है। यह सीधा-सीधा संविधान की भावना का उल्लंघन है।"

बीजेपी सांसद ने कोर्ट पर देश में धार्मिक तनाव फैलाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका को न्याय करने का अधिकार है, लेकिन अगर वह शासन चलाने लगे, तो लोकतंत्र खतरे में पड़ सकता है।

निशिकांत दुबे ने आगे कहा कि, "कोर्ट के इस तरह के फैसले देश में धार्मिक युद्ध भड़काने का काम कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट अगर इसी तरह हस्तक्षेप करता रहा, तो एक दिन जनता संसद और कोर्ट – दोनों से सवाल करेगी।"

निशिकांत दुबे के इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में गर्मी ला दी है। अब देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट या अन्य संवैधानिक संस्थाएं इस बयान पर क्या प्रतिक्रिया देती ।