“परीक्षा पे चर्चा 2026" कार्यक्रम में छात्रों के साथ प्रधानमंत्री की बातचीत का मूल पाठ

यम लिखना स्टार्ट किया है।

प्रधानमंत्री- पोयम लिखना, अच्छा!

विद्यार्थी- I used to be scared of presentations but now it’s one of my friend. जैसे आपकी तरफ है, देखा है कि आप कितना जैसे वो कॉन्फिडेंस है और यह बुक भी मैं पढ़ता हूं। अभी मैं कॉन्फिडेंस में हूं और ये पर्सिस्टेंस कि जब मैं फेल करूंगा, तो मैं क्विट नहीं करूंगा, मैं फिर से तैयार करूंगा, तो मैं अभी जैसे आगे में मैं ये प्रेजेंटेशन कर सकता हूं।

प्रधानमंत्री- तो अभी हिम्मत आ गया।

विद्यार्थी- हां, इसलिए सर!

प्रधानमंत्री- मान लीजिए, फुटपाथ पर गरीब महिलाएं सामान बेच रही हैं और इतने में कोई झगड़ा हो गया, तो वो गरीब महिला, जिसने कभी टीवी को जवाब नहीं दिया, आपने देखा होगा वो कितना बढ़िया इंटरव्यू देती है। कैसे हुआ? क्या हुआ? कैसे हुआ? कारण क्या है, जो चीज उसने अपने अनुभव में, आंखों के सामने देखा, लाग लपेट नहीं, झूठ बोलना नहीं है, तो एकदम से सरलता से वो बता देती है। यह कॉन्फिडेंस कहां से आया? सच्चाई के कारण आया। आपका भी कॉन्फिडेंस कैसे आया? उस सच्चाई से आया कि जो मैं कर रहा हूं, मैंने जो किया है, मैं जो कह रहा हूं, मैं सही कर रहा हूं।

विद्यार्थी- मैं डरती थी कि पेपर देते टाइम मैं घबरा ना जाऊं, स्पेशली लिटरेचर में। देखती थी, इतना लेंदी है, उसी में घबरा जाती थी बुक पढ़ने के बाद। अब मुझे लगा, नाउ आई कैन, अब मैं नहीं घबराऊंगी। अब मुझे प्रैक्टिस करना है, लिख-लिख के और प्रैक्टिस करूंगी, ताकि मैं घबराऊं ना इतना लेंदी पेपर और मैं ज्यादा स्पीड से और तेजी से लिखने की कोशिश करूंगी। मैं अपना हैंडराइटिंग सब कुछ इंप्रूव करूंगी।

प्रधानमंत्री- वो एकदम कॉन्फिडेंस आ गया। अभी देखती हो, बाद में तो गलती नहीं पकड़ में आती।

विद्यार्थी- बिल्कुल नहीं! क्योंकि मुझे पता चल गया ना कि मुझे क्या प्रॉब्लम है। मैं घबरा जाती थी एक्चुअली पेपर देख के, लेकिन अब नहीं।

प्रधानमंत्री- देखिए यह सही चीज पकड़ा है, सचमुच में हम वीक नहीं है। हम हड़बड़ी में सब गलती कर देते हैं।

विद्यार्थी- यस सर।

प्रधानमंत्री- कुछ टेक्निक काम आती है। मान लीजिए, ऐसा पेपर है ना, चुपचाप 30 सेकंड ऐसे ही बैठिए और एकदम गहरी सांस लीजिए। सांस ऐसे लीजिए, एकदम सीना फूल जाए इतना, जितना भर सकते हैं, भरिए और फिर धीरे से उसके सांस को निकालिए, आपका मन एकदम से अलग हो जाएगा, फिर उसकी ओर देखिए, तो आपको नई चीज हाथ लग जाएगी, सही चीज हाथ लग जाएगी। नहीं आता है, इसलिए गलती होना अलग बात है, लेकिन आता है और गलती होगा ऐसा कभी नहीं होगा।

विद्यार्थी- नमस्कार सर! जय गुरु शंकर!

प्रधानमंत्री- नमस्कार!

विद्यार्थी- मेरा नाम निडुमल बर्मन है। सो सर मेरा क्वेश्चन यह है कि छोटे घर, शोर और कामकाज के बीच मतलब पढ़ना अक्सर थोड़ा मुश्किल हो जाता है और अगर माता-पिता हमारे सपनों को उतना सपोर्ट नहीं करते, उतना गंभीरता से नहीं लेते, तो अब हम क्या कर सकते हैं?

प्रधानमंत्री- देखिए मैं बताता हूं। मैंने एक वीडियो देखा था सोशल मीडिया पर, जो मेरे मन को छू गया था। एक पिताजी बैलगाड़ी में अपना जो रोजी-रोटी कमाने के लिए कुछ सामान लेकर के जा रहे थे, और उनका बच्चा उस बैलगाड़ी में सामान भरा पड़ा था, ऊपर कहीं सामान के ऊपर बैठा हुआ था, लेकिन क्या कर रहा था? वो अपनी किताब पढ़ रहा है यानी वो कंफर्ट की चिंता नहीं कर रहा।

विद्यार्थी- यस सर।

प्रधानमंत्री- कुछ लोग होते हैं कि भई नींद नहीं आती। क्यों नहीं आती? कमरा ऐसा है। अगर उसको फाइव स्टार होटल में रखोगे ना, तो भी नींद नहीं आएगी। तो यह जो सोच है कि सुविधा होगी तो क्षमता आएगी, ऐसा नहीं है। हमारे देश में बोर्ड के एग्जाम में जो नंबर लाते हैं, वो बच्चे कौन है? छोटे-छोटे गांव के हैं। पहले क्या होता था? बड़े परिवार के बड़ी स्कूल के बच्चे ही, अब ऐसा नहीं है। छोटे-छोटे परिवार के थे। अब वहां तो कोई कंफर्ट नहीं है। देखिए अभी मैं ब्लाइंड क्रिकेट टीम से बच्चियों को मिला और वो जीत करके आई थीं। जब मैंने उनको सुना, तो अपनी आंख में आंसू आ जाए, ऐसी बातें थी। घर नहीं है और ब्लाइंड है, खेलना सीखा, दिव्यांग होने के बावजूद भी वो यहां तक पहुंच गईं। तो उसको कहां पैदा हुई, कहां रहती थी, यह सब मैटर नहीं करता था। तो हम कंफर्ट जोन ही जीवन बनाता है। यह भ्रम में नहीं रहना चाहिए। जीवन बनता है जिंदगी जीने के तरीके से।

विद्यार्थी- माननीय प्रधानमंत्री जी को देखा, तो मुझे तो अपने आप पर विश्वास नहीं हो रहा कि वो आ रहे हैं। लीडर हैं इंडिया के तो मुझे लगा कि वो बहुत सीरियस रहते होंगे, लेकिन जब उनसे बातें की ना, बातें करके अपने-अपने लगे। उन्होंने जो एडवाइज दी थी उसको सुनकर ऐसा लगा कि हां मैं तो यह कर सकता हूं। अब मैं वो फॉलो करूंगा और अपने जीवन में उसको उन एडवाइज को फॉलो करने की कोशिश करूंगा।

विद्यार्थी- वणक्कम सर!

प्रधानमंत्री- वणक्कम!

विद्यार्थी- सर मेरा नाम निखिल है सर! मैं लैंड ऑफ टेंपल्स तमिलनाडु से आया हूं। सर तो एग्जाम्स के वक्त कभी-कभी हमारे घर में गेस्ट्स आते हैं सर, सर और वो हमारे प्रिपरेशन के बारे में पूछते हैं। कुछ चीजें हम मतलब हम अपने माइंड से निकाल के रख देते हैं, भूलना चाहते हैं, उसी के बारे में वापस पूछते हैं और हमें उसके बारे में याद दिला देते हैं। सर और इसके बारे में हमारे मम्मी-पापा भी कुछ कर नहीं पाते। सर तो मैं आपसे यह पूछना चाहता हूं, ऐसे सिचुएशनंस को हम कैसे हैंडल कर सकते हैं सर?

प्रधानमंत्री- मैं एक चालाकी बताता हूं, क्या करना चाहिए? जैसे आया ना, बोले अंकल जी आप बहुत सफल व्यक्ति हैं। मैंने सुना है, मुझे आप बताइए ना, बचपन में आप कैसे पढ़ते थे? क्या आपको कभी गुस्सा आता था क्या? आपको कभी टीचर मारते थे क्या? आप कैसे करते थे? वो पूछे उसके पहले आप पूछो। आप देखिए पूरा टेबल टर्न हो जाएगा।

विद्यार्थी- हां सर।

प्रधानमंत्री- जब वो आए मैं टोटली सरप्राइज था। जिन्हें अभी तक टीवी में देखा है। उन्हें रियल लाइफ में सीधा देखने को मिल रहा है और उन्होंने मतलब बहुत क्रिएटिव आंसर दिया। मैंने एक्सपेक्ट नहीं किया था। उन्होंने बोला कि सीधा टेबल पलट देने के लिए। हमें उनसे जाके पूछना चाहिए कि आपने कैसे किया? लाइफ में आपने इस स्टेज में इस पड़ाव को आपने कैसे पार किया?

विद्यार्थी- जुलेय सर! मेरा नाम पद्मा है। मैं लद्दाख से हूं। तो मेरा यह प्रश्न है कि हमारे जैसे हमारे उम्र के बच्चे को बड़े सपने देखने चाहिए? और उन्हें पूरा करने की शुरुआत कहां से करना चाहिए सर?

प्रधानमंत्री- सपने ना देखना, वो तो क्राइम है। सपने देखने ही चाहिए, लेकिन सपनों को गुनगुनाते रहना यह कभी काम नहीं आता है और इसलिए जीवन में कर्म को प्रधान देना चाहिए। मैं जहां हूं, वहां मुझे सफल होना है, तभी मैं आगे जाऊंगा। मैं देखता रहूं और मुझे अगर पेड़ पर चढ़ना ही है, तो आम देखता रहूं, आम देखता रहूं, तो आम नहीं पकड़ सकता। अब जैसे मान लीजिए, हमारा मन कर गया कि मुझे एस्ट्रोनॉट होना है और मुझे चंद्रमा पे जाना है, तो फिर मुझे पढ़ना चाहिए कि भई एस्ट्रोनॉट कौन हुए, उनकी बायोग्राफी क्या थी? यह स्पेस होता क्या है? धीरे-धीरे-धीरे-धीरे उसमें रुचि हमारी बढ़ानी चाहिए। फिर टीवी पर कोई कार्यक्रम है, तो उसको खास देखना चाहिए, तो आपको खाद पानी मिलता रहेगा। आपको फर्टिलाइजर जिसको कहे वह मिलता रहेगा, तो वो विचार आपका पनपेगा। औरों को बताने से फायदा नहीं होगा। कभी-कभी हम बता देंगे भई मजाक उड़ाएगा। यह तो एस्ट्रोनॉट बनने वाला है। तो हमारे मन के सपने पब्लिक नहीं करने चाहिए, लेकिन लिख करके रखना है।

विद्यार्थी- मैं बहुत नर्वस थी क्योंकि मुझे मेरा यह लाइफ का पहला एक्सपीरियंस था परीक्षा पे चर्चा पर, बट जैसे ही प्राइम मिनिस्टर मेरे सामने आते ही मेरा पूरा नर्वसनेस एक्साइटमेंट में बदल गया था।

विद्यार्थी- Sir, I have a question कि हम जो बड़े सपने देखते हैं, उन्हें हमें पूरा करने के लिए रोजाना कौन सी एक छोटी सी हैबिट या कौन सी एक आदत अपनानी चाहिए, जिससे हम अपने सपने के नजदीक पहुंचते जाएं?

प्रधानमंत्री- एक तो मुझे लगता है कि हमने बायोग्राफी पढ़नी चाहिए, बड़े जो भी सब है उसके विषय में, कभी-कभी क्या होता है, हमारे सामने वह बड़े बने वही पता चलता है, लेकिन वो भी तो कभी छोटे थे। आज पीएम आपको मिला होगा, वो पीएम कभी तो छोटा होगा ना, तो हम जब बायोग्राफी पढ़ते हैं, तो लगता है नहीं भाई यह बड़ा तो था, लेकिन पहले तो यहां था। फिर उसमें से आप को-रिलेट करोगे कि साहब मैं भी ऐसा ही हूं, यह तो मैं भी करता हूं। वही करते हैं, ऐसा नहीं है। फिर आपका विश्वास बढ़ेगा। हां-हां यहां से शुरू कर सकते हैं। यह पहला कदम है। उन्होंने ऐसा किया था, यह दूसरा कदम है। उसने ऐसा किया था, यह तीसरा कदम है। तो आप अपने आप अपना रास्ता मजबूती से आगे बढ़ा सकते हैं।

विद्यार्थी- उनकी एडवाइस सुनके मुझे ऐसा लगा कि जो मेरा आइडियल है। मैं उसके देखूं और उसकी मतलब पूरी जानकारी निकालूं और देखूं कि वो किस बैकग्राउंड से बिलोंग करते थे। उनके सामने क्या परेशानियां थी? उन्होंने क्या-क्या फेस किया? तो उन उनको जान के मैं क्या एक छोटा सा स्टेप ले सकती हूं और उस पर काम कर सकती हूं और वो जब पहला वाला स्टेप कंप्लीट हो जाए, तब हम दूसरे स्टेप पर जा सकते हैं।

विद्यार्थी- सर मुझे आपको एक कविता सुनानी है।

प्रधानमंत्री- कविता सुनानी है। सुनाओ।

विद्यार्थी- हम सबके अरमान हैं आप। भारत के अभिमान हैं आप। भारतवर्ष के केवट हैं आप। मानवता के सेवक हैं आप। मैं बड़ी दूर से आई हूं। कुछ प्रश्नों को अपने साथ भी लाई हूं। परीक्षा पे चर्चा की सौगात उठाए हैं। फिर हम सब ने यह मौका पाए हैं। आप ममता की परछाई हैं। वंचितों के हमराही है। देश को आगे रखते हैं। भारत मां की जय कहते हैं। तो लो मैं भी यह कहती हूं, मन की बात रखती हूं। आप साधना पुरुष और योगी हो। भारत के सपनों के मोदी हो। यह कहकर मैंने वाणी को विराम दिया। फिर से आपको प्रणाम किया।

प्रधानमंत्री- वाह! वाह! बढ़िया कविता बनाती हो।

विद्यार्थी- जब वो मेरे से मिले, जब मैं पोयम सुना रही थी और जब वो मेरे से बात कर रहे थे और जैसे-जैसे पास आ रहे थे, ऐसा लग रहा था, अब मेरे को चक्कर आएंगे और अब मैं यहीं गिर जाऊंगी।

प्रधानमंत्री- यह अच्छा हुआ। आप लोगों ने सब अपनी-अपनी बातें लिखी।

विद्यार्थी- धन्यवाद सर!

प्रधानमंत्री- आइए!

प्रधानमंत्री- अच्छा भाई मैं आपसे कुछ सवाल पूछना चाहता हूं। आपने मुझे बहुत सवाल पूछे। यह जो हिंदुस्तान में जो मैं विकसित भारत की बात करता हूं। कौन सी साल बताता हूं, मैं विकसित भारत के लिए?

विद्यार्थी- 2047

प्रधानमंत्री- 2047

विद्यार्थी- यस सर!

प्रधानमंत्री- क्यों बताता हूं?

विद्यार्थी- क्योंकि ये 100 साल की एक सेंचुरी का गोल है।

प्रधानमंत्री- आजादी को 100 साल हों। जब भारत की आजादी के 100 साल होंगे, तब आपकी ऐज कितनी होगी?

विद्यार्थी- 39

विद्यार्थी- 40

प्रधानमंत्री- यह 39-40-35-45, यह जो ऐज होगी, वो कितनी महत्वपूर्ण उम्र होगी आपकी, कितनी सारी चीजें आपके सामने तैयार होगी? तो यह सब मेहनत किसके लिए कर रहा हूं?

विद्यार्थी- हमारे लिए!

प्रधानमंत्री- अब हम सबने करनी चाहिए कि नहीं करनी चाहिए?

विद्यार्थी- यस सर!

प्रधानमंत्री- अब देखिए महात्मा गांधी जी ने 1915 में वो वापस आए अफ्रीका से और आजादी का आंदोलन चलाया, तो 1915 से 1947 तक आजादी-आजादी लगे रहे कि नहीं लगे रहे?

विद्यार्थी- यस सर!

प्रधानमंत्री- आजादी आई कि नहीं आई?

विद्यार्थी- यस सर!

प्रधानमंत्री- भगत सिंह जी, फांसी के तख्त पर चढ़ गए।

विद्यार्थी- यस सर!

प्रधानमंत्री- छोटी आयु में चढ़ गए, लेकिन आजादी का सपना बो करके गए कि नहीं गए?

विद्यार्थी- यस सर!

प्रधानमंत्री- हर दिलों में हर नौजवान को आजादी के लिए जीने के लिए सिखाया कि नहीं सिखाया?

विद्यार्थी- यस सर!

प्रधानमंत्री- अगर आजादी के 25 साल पहले, आजादी के 30 साल पहले जो सपना देखा गया, उन सपनों के लिए जो उन्होंने कष्ट सहन किए, त्याग किया, बलिदान किया, आजादी मिली कि नहीं मिली?

विद्यार्थी- यस सर!

प्रधानमंत्री- अगर इतनी बड़ी आजादी मिल सकती है, तो क्या हम सबके प्रयत्नों से विकसित भारत बन सकता है कि नहीं बन सकता है?

विद्यार्थी- यस सर!

प्रधानमंत्री- आपको विश्वास है?

विद्यार्थी- यस सर!

प्रधानमंत्री- और इसलिए कभी भी भूलना नहीं चाहिए। यह सपना हमेशा आपको भी घर में जाके लिखना चाहिए। विकसित भारत के लिए मुझे यह करना है। अब कौन सी ऐसी पांच चीजें हैं, जिसको मैं करूं विकसित भारत के लिए?

विद्यार्थी- सर अपने अंदर स्किल्स डेवलप करेंगे।

विद्यार्थी- सर हम खुद पर विश्वास कर कर आगे बढ़ेंगे।

प्रधानमंत्री- खुद पर विश्वास करेंगे।

विद्यार्थी- स्वदेशी चीजों का ज्यादा उपयोग करेंगे।

प्रधानमंत्री- अब यह स्वदेशी करेंगे तो करेंगे कैसे? तो पहले हमें मन को तैयार करना पड़ेगा।

विद्यार्थी- यस सर!

प्रधानमंत्री- स्वदेशी चीज तो बाद की बात है।

विद्यार्थी- यस सर!

प्रधानमंत्री- हम जो गुलामी की मानसिकता में जीते हैं। स्कूल में स्कूल में कोई दोस्त विदेशी जैकेट पहन के आया और कहेगा, यह तो फलाने देश का है, तो हमारा ध्यान कैसा रहता है? अच्छा-अच्छा, होता है कि नहीं होता है?

विद्यार्थी- यस सर!

प्रधानमंत्री- सर एक काम आप लोग करेंगे।

विद्यार्थी- यस सर!

प्रधानमंत्री- सुबह ब्रश करने से लेकर के दूसरे दिन सुबह ब्रश करने तक, हम जिन-जिन चीजों का उपयोग करते हैं, उसका लिस्ट बनाइए। आपको पता भी नहीं होगा, कंघी भी विदेशी होगी। आपको पता ही नहीं होगा। जूते भी विदेशी होंगे, आपको पता नहीं होगा। एक बार आपको लिख करके देखना चाहिए। चलो भाई, इस महीने में यह 10 चीजें पुरानी हो जाएगी, अब नई इंडियन लाएंगे। अगले महीने यह 10 पूरी हो जाएगी, इंडियन लाएंगे। तो एक साल के भीतर-भीतर सब विदेशी चीजें निकल जाएगी, इंडियन चीजें घर में आ जाएगी। तो हमें तय करना चाहिए, जैसा भी होगा, मेरे शरीर पर, मेरे परिवार में, मेरे जीवन में, मेरी कोशिश होगी कि मैं पहले देखूंगा कि बताओ पहले इंडियन है कि नहीं है, तो करेंगे?

विद्यार्थी- यस सर!

प्रधानमंत्री- अगर हम ही हमारे देश की चीजों का गौरव नहीं करेंगे, तो दुनिया करेगी क्या?

विद्यार्थी- नो सर!

प्रधानमंत्री- अब जैसे हम लोग लेट हो जाते हैं, तो क्या बोलते हैं? हम बोलते हैं, यह तो इंडियन टाइम है। बोलते हैं कि नहीं बोलते?

विद्यार्थी- यस सर!

प्रधानमंत्री- मतलब हम लेट हम हुए। कार्यक्रम हमने देर से शुरू किया और गाली किसको दी?

विद्यार्थी- इंडिया को।

प्रधानमंत्री- इंडिया को। दूसरा है कर्तव्य का पालन। पहले अपना जीने के तरीका बदलो। पहले शुरुआत करो स्वच्छता से, हम गंदगी नहीं करेंगे। हम दुनिया में कहीं देश का चित्र देखते हैं, तो साफ-सुथरा दिखता है।

विद्यार्थी- यस सर!

प्रधानमंत्री- यह साफ-सुथरा क्यों है? सफाई करने वाले के कारण साफ-सुथरा है कि लोगों ने गंदगी नहीं की इसलिए साफ सुथरा है।

विद्यार्थी- लोगों ने गंदगी नहीं की इसलिए!

प्रधानमंत्री- तो हमें अगर विकसित भारत बनाना है, तो हम तय करें, हम गंदगी नहीं करेंगे और हम स्वच्छता के विषय में, परिवार में, बाहर, मोहल्ले में, सब जगह पर जरा भी कॉम्प्रोमाइज नहीं करेंगे। किसी ने फेंक दिया, तो उसके साथ झगड़ा नहीं करेंगे, उठाकर ले लेंगे हम और हम उस कूड़े का, तो वह देखेगा, वो शर्मिंदगी महसूस करेगा।

विद्यार्थी- यस सर!

विद्यार्थी- कि मेरा कचरा इसने उठाया।

प्रधानमंत्री- और इसलिए हमने जो नागरिक का कर्तव्य है, उसका पालन करना चाहिए। हमारा हेल्दी रहना भी एक प्रकार से कर्तव्य है।

विद्यार्थी- यस सर!

प्रधानमंत्री- तो हमें अपने कर्तव्यों का पालन अगर इतना भी कर लें, तो दुनिया की कोई ताकत भारत को विकसित भारत बनाने से रोक नहीं सकती है और आप जब 35-40 साल के होंगे, उसका सबसे ज्यादा मजा लेने का मौका आपको मिलेगा।

विद्यार्थी- यस सर!

प्रधानमंत्री- अब मुझे बताइए जिसका फल आपको मिलने वाला है, वो काम आपको करना चाहिए कि नहीं करना चाहिए?

विद्यार्थी- यस सर!

प्रधानमंत्री- ज्यादा से ज्यादा आपको करना चाहिए कि नहीं करना चाहिए?

विद्यार्थी- यस सर!

प्रधानमंत्री- चलिए और मैं एक सवाल पूछता हूं। आप उस पीढ़ी में हैं, आपके पास इतना खुला आसमान है। इतना बड़ा कैनवास है। आपको ध्यान में आता है कि ऐसी कौन सी चीजें आज हम कर सकते हैं।

विद्यार्थी- यह आजकल सारा जमाना ही जैसे एआई का है। काफी चीजें एआई में होते हैं।

प्रधानमंत्री- देखिए आप लोग भाग्यशाली हैं। आपको इतना टेक्नोलॉजी का अपॉर्चुनिटी मिला है, जो मेरे जमाने में नहीं था। उसका सही उपयोग करना, यह विवेक बुद्धि हमको विकसित करनी होगी। एआई आपकी ताकत को बढ़ाने वाली होनी चाहिए। एआई का उपयोग कैसे करें? एक तो होता है कि मैं एआई को यह कहूं कि फलानी बायोग्राफी है। उसका मुझे मेन पॉइंट बता दो, तो एआई बता देगी 10 पॉइंट और मुझे लगा मुझे बहुत ज्ञान हो गया। गाड़ी चल जाएगी। दोस्तों से कहता हूं अभी गप्पे मारने हैं, तो बड़े ठहाके से आपने एआई का उपयोग किया। लेकिन इससे आपका लाभ हुआ क्या? नहीं हुआ। लेकिन अगर मैं एआई को पूछूं कि मेरी ये उम्र है, मेरी इन विषयों में रुचि है, आप मुझे बताइए कि कौन सी 10 अच्छी बायोग्राफी है, जो मैं पढूं। तो एआई आपको ढूंढ करके 10 बायोग्राफी दिखाएगा, फिर बाजार में जाइए और उसमें से किताब खरीदिए। तो एआई आपको काम आई।

विद्यार्थी- यस सर!

प्रधानमंत्री- आपका डेवलपमेंट हुआ।

विद्यार्थी- यस सर!

प्रधानमंत्री- आपको लाभ हुआ।

विद्यार्थी- यस सर!

विद्यार्थी- मेरा फेवरेट पार्ट था कि उन्होंने जो एआई को लेकर बोला कि एआई तुम यूज़ करो। एआई की एक हेल्प है। बट वो हमें आगे भी हमें यूज़ कर सकते हैं। बट वो सीधा हमें हमारे जो हमारा गोल है, वहां तक नहीं पहुंचा सकता। मैं भी ऐसे यूज करती हूं, टेक्नोलॉजी से रिलेटेड ऐप बनाना ऐसे, तो मुझे अच्छा लगा कि उन्होंने बोला कि एआई का इस तरीके से यूज करो, ताकि हम सबके लिए अच्छे से यूज़फुल हुए।

विद्यार्थी- सर मुझे बांसुरी सुनाना है आपको। मैं कर्नाटक शास्त्रीय संगीत अभ्यास कर रहा हूं बांसुरी, तो आज मैं एक संस्कृत का कंपोजिशन बजा रहा हूं।

प्रधानमंत्री- हां सुनाओ-सुनाओ!

प्रधानमंत्री- वाह! चलिए, बहुत-बहुत धन्यवाद आप लोगों का!

विद्यार्थी- सर मैंने ना एक आपका स्केच बनाया है। मैं आपको दिखा सकती हूं प्लीज?

प्रधानमंत्री- अच्छा! कहां है?

विद्यार्थी- सर यह मैंने आपके लिए बनाया है।

प्रधानमंत्री- क्या बनाया बेटा?

विद्यार्थी- सर हैंडमेड बुके बनाया है।

प्रधानमंत्री- अच्छा!

विद्यार्थी- यह पहाड़ में ट्रेडिशनल उत्तराखंड का है यह, यह टोकरी है, जैसे बसंत पंचमी आती है, तो इसमें हम सुबह उठते हैं और फूल तोड़ते हैं, फिर लोगों के घर-घर पर डालते हैं।

विद्यार्थी- त्रिपुरा का फेमस!

प्रधानमंत्री- त्रिपुरा सुंदरी!

विद्यार्थी- It was made by face coconut shell.

विद्यार्थी- and sir this is tea from

प्रधानमंत्री- वाह चाय वाले को चाय!

विद्यार्थी- Sir it’s organic tea.

प्रधानमंत्री- ऑर्गेनिक टी, तुम बहुत अच्छी कविता लिखती हो] लगातार लिखती रहो!

विद्यार्थी- यस सर!

प्रधानमंत्री- अच्छा आसाम का गमोछा। शाबाश! चलिए, बहुत-बहुत धन्यवाद सबका! बहुत शुभकामनाएं!

विद्यार्थी- थैंक यू सर! बाय सर! बाय!

प्रधानमंत्री- धन्यवाद सबका!

विद्यार्थी- थैंक यू सर!

प्रधानमंत्री- बहुत सारे स्टूडेंट्स ने मुझे यह सजेशन भेजा था कि देश के अलग-अलग हिस्सों में भी परीक्षा पे चर्चा होनी चाहिए। इस स्पेशल एपिसोड में आप यही देखने जा रहे हैं। अगर परिवार में भी किसी एक की अच्छाई की बात होती है, तो हमने उस भाई या उस बहन से उसकी अच्छाइयों को सीखने का प्रयास करना चाहिए। जो व्यक्ति बहुत बड़ा बन गया है, वो बड़ा बनने की इच्छा होना बुरा नहीं है। लेकिन वो बड़ा बना है, कहीं से अपने को जोड़ो मत। शिक्षा की जीवन में भी जरूरत है, समाज जीवन में भी जरूरत है। लेकिन जिंदगी में खेल होना चाहिए, यह भी बहुत जरूरी है। तो आप में से अगर कोई कुछ बातें करना चाहते हो, अपनी बात बताना चाहते हो और मुझे सुनना है। कौन शुरू करेगा?