OTT प्लेटफॉर्म्स पर अश्लील कंटेंट को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती

 

देश के सर्वोच्च न्यायालय ने OTT प्लेटफॉर्म्स पर बढ़ते अश्लील कंटेंट को लेकर गहरी चिंता जताई है।

सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि OTT प्लेटफॉर्म्स पर फैल रही अश्लीलता समाज के लिए एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। कोर्ट ने इस मामले को बेहद गंभीर मानते हुए केंद्र सरकार को ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही, कोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी कर इस मसले पर जल्द से जल्द जवाब मांगा है।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने नौ बड़े OTT और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भी नोटिस भेजा है, जिनसे यह पूछा गया है कि वे इस तरह के कंटेंट पर कैसे नियंत्रण रख रहे हैं और भविष्य में इसे रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।

यह याचिका वरिष्ठ पत्रकार श्री उदय माहुरकर द्वारा दायर की गई थी। अपनी याचिका में माहुरकर ने कहा कि सस्ते इंटरनेट डेटा की वजह से आज छोटे-बड़े सभी उम्र के लोग आसानी से OTT प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध अश्लील सामग्री तक पहुंच बना पा रहे हैं। इसका सीधा प्रभाव समाज पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह के कंटेंट को देखकर युवाओं में गलत मानसिकता पनप रही है और समाज में अपराध और अपराधियों की संख्या बढ़ती जा रही है।

कोर्ट ने इस याचिका को सुनते हुए माना कि यह समस्या अब सामान्य मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि यह एक गंभीर सामाजिक संकट का रूप ले रही है। अदालत ने इस पर सरकार से जल्द से जल्द विस्तृत जवाब मांगा है और आवश्यक दिशा-निर्देश बनाने की संभावना पर भी विचार करने को कहा है।

इसी बीच खबर आ रही है कि केंद्र सरकार भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए 'डिजिटल इंडिया बिल' पर तेजी से काम कर रही है। माना जा रहा है कि इस नए कानून के जरिए OTT प्लेटफॉर्म्स और सोशल मीडिया पर कंटेंट मॉडरेशन को लेकर सख्त प्रावधान किए जाएंगे।

सूत्रों के मुताबिक, इस बिल में प्लेटफॉर्म्स को यह सुनिश्चित करने का दायित्व सौंपा जाएगा कि वे अश्लील, हिंसक और समाज को विघटित करने वाली सामग्री को अपनी सेवाओं पर ना फैलने दें।

जैसे-जैसे डिजिटल दुनिया का दायरा बढ़ता जा रहा है, वैसे-वैसे उसके दुष्प्रभाव भी सामने आ रहे हैं। आज की इस सुनवाई ने निश्चित तौर पर यह साफ कर दिया है कि अब डिजिटल माध्यमों पर नियंत्रण के लिए सख्त कानून और दिशा-निर्देश समय की जरूरत बन चुके हैं।