आम की बाग़ अचानक सूखने लगी

 

भावनगर के प्रसिद्ध सोसिया क्षेत्र में स्थित केसर आम के बाग अचानक सूखने लगे हैं। पहले असमय बारिश और तूफान से परेशान किसानों को अब और बड़ी मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है। यह साफ कहा जा सकता है कि इस गर्मी में आम के दाम आम जनता की पहुँच से बाहर होंगे। फिलहाल भावनगर के आम के बाग धीरे-धीरे साफ हो रहे हैं और प्रदूषण का असर इतना अधिक हुआ है कि बाग अचानक सूखने लगे हैं।
ग्लोबल वॉर्मिंग का असर कहें या वातावरण में हुए अप्रत्याशित बदलाव, भावनगर जिले में इस बार फलों के राजा केसर आम के उत्पादन में चौंकाने वाली गिरावट देखी जा रही है। औसतन 30 से 50 प्रतिशत तक उत्पादन में कमी आने से बाग मालिकों को रोने की नौबत आ गई है। इतना ही नहीं, इस बार आम की फसल देर से आई है, जिससे बाजार में मांग के मुकाबले आपूर्ति नहीं हो पाई और दामों में आए उछाल के कारण भावनगरवासियों को इस बार आम की मिठास के बजाय उसकी खटास का अनुभव हो रहा है।
भावनगर जिले की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए बात करें तो जिले के समुद्री इलाकों जैसे भावनगर, घोघा, तलाजा और शेत्रुंजी नहर के दोनों किनारों पर स्थित पालिताणा और जेसर तालुका के गांवों में बड़े पैमाने पर केसर आम का उत्पादन होता है। आम पर मोर बैठना और उसकी पकने की प्रक्रिया के लिए सबसे अनुकूल वातावरण भावनगर जिले में पाया जाता है। इस कारण सौराष्ट्र में सबसे पहले आम का उत्पादन भावनगर जिले में होता है और यहीं सबसे पहले इसकी बिक्री शुरू होती है। हालांकि इस साल फरवरी के मध्य में आम पर मोर आ चुके थे और अच्छी मोर के चलते किसानों ने अच्छे उत्पादन की उम्मीद से बाग की देखरेख शुरू कर दी थी। लेकिन मार्च के पहले सप्ताह तक वातावरण में नमी, कुहासा और मौसम में बदलाव की वजह से आम के मोर जलने और झड़ने लगे, जिससे किसानों की उम्मीदों पर पानी फिर गया।

किसानों और बाग मालिकों के अनुसार, इस बार औसत उत्पादन में 50 से 60 प्रतिशत तक की चिंताजनक गिरावट देखी गई है। साथ ही, उत्पादन में देरी के कारण किसानों की हालत और खराब हो गई है। आमदनी की जगह केवल खर्च उनके सिर पर आ गया है। फिलहाल अप्रैल का मध्य चल रहा है, और आम की ऊँची कीमतों को देखते हुए आम और गरीब वर्ग को इसकी मिठास का स्वाद लेने के लिए कम से कम दो सप्ताह का इंतजार करना पड़ सकता है।
अलंग-सोसिया में 700 से अधिक आम के पेड़ रखने वाले किसान ने बताया कि पिछले दो सालों से वे और उनके जैसे 12 से अधिक गांवों के किसानों की बागों में अच्छा उत्पादन होता था। लेकिन इस साल उनके 700 पेड़ों में कुल मिलाकर अब तक केवल 15 मण आम की फसल हुई है। अन्य बागों की भी यही स्थिति है। भावनगर की मंडियों में आम की फसल देर से आने और मांग के मुकाबले कम आपूर्ति की स्थिति को तळाव फ्रूट मार्केट के अध्यक्ष रामदेवसिंह गोहिल ने भी स्वीकारा। उनके अनुसार हर साल सौराष्ट्र में सबसे पहले भावनगर में आम की बिक्री शुरू हो जाती है, लेकिन इस बार देरी के साथ-साथ उत्पादन में भी गिरावट आई है। उनका मानना है कि अगले सप्ताह के अंत में जब अन्य जिलों की आम की फसल बाजार में आएगी, तब दामों में कुछ गिरावट देखने को मिल सकती है।