विनु शिंघाला की मौत के बाद जिगिशा पटेल ने न्याय के लिए मुहिम उठाई है। जिगिशा पटेल ने उनकी इस कुर्बानी को लेकर विनु शिंघाला की प्रतिमा बनाने का फैसला किया है जिसकी वजह से जिगिशा पटेल जगह जगह जाकर अपने समाज से इस मुहिम को आगे बढ़ाने की जवाबदारी उठाई है। उनकी इस मुहिम को देखकर लोग भी इस मुहिम से जुड़ रहे है।
जिगिशा पटेल ने नेशन एवरीडे न्यूज़ से बातचीत करते हुए बताया की,
आज हम सब यहाँ एकत्र हुए हैं, एक ऐसे व्यक्तित्व को याद करने के लिए जिन्होंने समाज की भलाई के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया ऐसे विनोदभाई सिंघाला जो केवल एक नाम नहीं, बल्कि एक आंदोलन कारी थे। एक प्रेरणा दाईं थे। उन्होंने न केवल पाटीदार समाज को एकता का पाठ पढ़ाया, बल्कि अपने बलिदान से हमें यह दिखा दिया कि अगर कोई अकेला इंसान ठान ले, तो समाज को दिशा देने वाला बन सकता है।
विनोदभाई आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी सोच, उनके मूल्य और उनका समर्पण आज भी हर पाटीदार के दिल में जीवित है। अफ़सोस इस बात का है कि हम उनकी स्मृति में वह नहीं कर सके, जो करना चाहिए था।अब समय आ गया है हर गांव, हर गली और हर दिल में विनोदभाई के विचारों को फिर से जीवित करने का।
अब समय है उन लोगों को पहचानने का, जिन्होंने समाज की ताकत को कमजोर किया है, जो आज भी गुलामी की मानसिकता में जी रहे हैं।
विनुभाई सिंघला का जीवन हमें यह सिखाता है कि समाज की भलाई के लिए व्यक्तिगत बलिदान आवश्यक है। हमें उनके विचारों को अपनाकर, समाज में एकता, समानता, और न्याय की भावना को पुनः स्थापित करना होगा।
आज का दिन उस आत्मा को याद करने का दिन है, जिसने बिना किसी स्वार्थ, बिना किसी लालय, अपने समाज को आगे ले जाने के लिए अपने जीवन की परवाह नहीं की... हम बात कर रहे हैं विनोदभाई सिंघाला की। एक नाम नहीं, एक विचारधारा थे। एक ऐसा दीपक, जो अंधेरे में रोशनी बनकर जला लेकिन हम उस रोशनी को संभाल नहीं पाए।
हम सब इस बात को स्वीकार करें -विनोदभाई हमारे लिए जो कर गए, उसका मूल्य हम पहचान नहीं पाए। आज वे हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका संघर्ष, उनके विचार, हर पाटीदार के दिल की धड़कन में ज़िंदा हैं।हमने क्या खोया, और क्या सीखा?हमने एक मार्गदर्शक खोया, पर हमने यह भी सीखा कि जब समाज बंटा होता है, तब कोई अकेला लड़ता है। और जब समाज एकजुट होता है तब इतिहास रचा जाता है।आज समाज में कई नेता आते हैं, कुर्सी के पीछे भागते हैं, पर जाते ही भुला दिए जाते हैं। क्यों? क्योंकि उनका उद्देश्य केवल सत्ता होता है, सेवा नहीं। उन्होंने बस एक सपना देखा -एक सशक्त, संगठित पाटीदार समाज।आज की स्थिति कुछ स्थापित नेता पाटीदार समाज की शक्ति को कमज़ोर कर रहे हैं।
वे अपने अहंकार में समाज को बांट रहे हैं, अपने स्वार्थ में गोंडल और गुजरात को अलग-अलग मानते हैं।
वे समाज के नाम पर खुद की सत्ता बनाना चाहते हैं। पर क्या हम उन्हें ऐसा करने देंगे आज ज़रूरत है एकजुट होने की।जब हम समाज की ओर देखते हैं, तो पाते हैं कि कुछ नेता अपनी शक्ति का दुरुपयोग कर रहे हैं, और समाज के मूल्यों से भटक गए हैं। हमें यह समझना होगा कि समाज की प्रगति तभी संभव है जब हम सभी मिलकर एकजुट हों और सही दिशा में कदम बढ़ाएं।हम वह समाज हैं
जिसने देश के निर्माण में भाग लिया है। हम वह समाज हैं जो एक बार जो ठान ले, उसे पूरा कर के दिखाता है।तो फिर कब तक हम चुप रहेंगे? कब तक अन्याय सहेंगे अब समय है एकजुट होने संगठित होने का और अपने हक की आवाज़ बुलंद करने का। गोंडल के लोगों को अब यह दिखाना होगा कि पाटीदार केवल इतिहास नहीं है, पाटीदार भविष्य की ताकत है। हम किसी से डरेंगे नहीं, हम किसी के सामने झुकेंगे नहीं।
अगर ज़रूरत पड़ी तो हम समाजिक संस्था, राजनीति, और प्रशासन में नए प्रतिनिधि देंगे -लेकिन सच्चे, सेवाभागी जय सरदार के नारे के साथ यह आंदोलन शुरू हुआ, तो यह केवल एक आंदोलन नहीं रहेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक उदाहरण बन जाएगा। विनोदभाई का सपना अधूरा नहीं रहेगा। हम मिलकर पूरा करेंगे। उनकी याद को सम्मान मिलेगा, और उनके विचार, फिर से जीवित होंगे।