“भारत में पहला स्वदेशी एचपीवी परीक्षण को मिली मान्यता, गर्भाशय-ग्रीवा कैंसर से लड़ाई में बड़ा कदम!”
भारत ने गर्भाशय-ग्रीवा कैंसर के खिलाफ एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। देश में पहला स्वदेशी एचपीवी परीक्षण अब आधिकारिक रूप से मान्यता प्राप्त कर चुका है।
आपको बता दें कि गर्भाशय-ग्रीवा कैंसर, महिलाओं में विश्व स्तर पर चौथा सबसे आम कैंसर है। चौंकाने वाली बात यह है कि इसके 99 प्रतिशत मामलों में एचपीवी यानी ह्यूमन पैपिलोमा वायरस की भूमिका पाई जाती है, जो मुख्य रूप से यौन संपर्क से फैलता है।
वैज्ञानिकों ने अब तक 14 प्रकार के एचपीवी की पहचान की है, जो कैंसर पैदा करने की क्षमता रखते हैं। इनमें एचपीवी टाइप 16 और 18 सबसे खतरनाक माने जाते हैं और ये वैश्विक स्तर पर करीब 70 प्रतिशत गर्भाशय-ग्रीवा कैंसर के मामलों के लिए जिम्मेदार हैं।
भारत सरकार ने इस गंभीर खतरे को भांपते हुए 9 से 14 वर्ष की आयु की लड़कियों के लिए एचपीवी के खिलाफ तीन-चरणीय टीकाकरण शुरू करने का निर्णय लिया है। इसके तहत सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने वर्ष 2023 में “CERVAVAC” नामक वैक्सीन भी लॉन्च की है।
इसके साथ ही, एचपीवी स्क्रीनिंग के लिए भारत का पहला स्वतंत्र परीक्षण, जैव प्रौद्योगिकी विभाग और बीआईआरएसी के सहयोग से तैयार किया गया है। इस परीक्षण को मोल्बियो डायग्नोस्टिक्स लिमिटेड और मायलैब डिस्कवरी सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, पुणे ने विकसित किया है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि इस परीक्षण को भारत सरकार के साथ-साथ विश्व स्वास्थ्य संगठन से भी मान्यता प्राप्त हुई है।
अगर हम आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2022 में भारत में गर्भाशय-ग्रीवा कैंसर के 1,23,907 नए मामले सामने आए थे और 77,348 महिलाओं की मौत हुई थी। सरकार का लक्ष्य इन आंकड़ों को आने वाले वर्षों में तेजी से घटाना है।
भारत में विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त अन्य टीके भी उपलब्ध हैं, जिनमें गार्डासिल और सर्वारिक्स शामिल हैं।
सरकार के इन प्रयासों के साथ-साथ हमें भी अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। स्वच्छता बनाए रखें, नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं, पौष्टिक आहार लें, तंबाकू से बचें और जागरूकता कार्यक्रमों में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लें।
याद रखें — जागरूकता ही बचाव है।
लेख- अमित राजपूत