इंफ्लुएंसरों पर ऑनलाइन गेमिंग ऐप्स के प्रमोशन को लेकर राजकोट पुलिस की बड़ी कार्रवाई

 

आज की युवा पीढ़ी के लिए ऑनलाइन गेमिंग एक आकर्षण के साथ-साथ गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। गुजरात के राजकोट में पुलिस ने ऐसे ऑनलाइन गेमिंग ऐप्स का प्रमोशन करने वाले सोशल मीडिया इंफ्लुएंसरों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। पुलिस का कहना है कि ये ऐप्स युवाओं को जुए की ओर धकेलते हैं, जिससे उनके जीवन पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।

 

आठ इंफ्लुएंसरों पर हुई कार्रवाई

राजकोट पुलिस ने अब तक आठ इंफ्लुएंसरों के खिलाफ शिकायत दर्ज की है जो सोशल मीडिया पर ऑनलाइन जुए से संबंधित ऐप्स का प्रचार कर रहे थे। कल दो इंफ्लुएंसरों को हिरासत में लिया गया था और आज छह अन्य के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है। जिन प्रमुख नामों के खिलाफ शिकायत दर्ज हुई है, उनमें निलेश चावड़ा, भावेश राठौड़, लक्ष्मण जंजवाडिया, सागर छैया, इलेश देरवाडिया और विजय मजेठिया शामिल हैं।

 

बड़े चेहरों पर चुप्पी, छोटे इंफ्लुएंसरों पर शिकंजा

इस पूरे मामले में सबसे बड़ी विडंबना यह है कि इन ऐप्स का प्रमोशन केवल छोटे-मोटे इंफ्लुएंसर ही नहीं, बल्कि बड़े बॉलीवुड सितारे और क्रिकेट जगत की हस्तियां भी कर रहे हैं। बावजूद इसके, पुलिस की कार्रवाई फिलहाल सिर्फ इन क्षेत्रीय या मझौले स्तर के इंफ्लुएंसरों तक ही सीमित दिखाई दे रही है। आम जनता का सवाल यह है कि क्या कानून सभी के लिए समान है या फिर बड़े सितारों को जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है?

 

पुलिस की दलील और आगे की कार्रवाई

पुलिस का कहना है कि इन ऐप्स का प्रचार करना आईटी एक्ट और जुए संबंधित कानूनों के अंतर्गत अपराध की श्रेणी में आता है, खासकर जब ये ऐप्स बच्चों और युवाओं को लुभाकर उन्हें फाइनेंशियल नुकसान की ओर धकेलते हैं। सभी आठों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है। उनके सोशल मीडिया पोस्ट, भुगतान के सबूत और प्रमोशन से संबंधित डाटा की गहन छानबीन की जा रही है।


यह कार्रवाई एक अहम कदम हो सकती है, यदि इसे निष्पक्ष रूप से सभी स्तरों पर लागू किया जाए। वरना यह धारणा बनती जाएगी कि कानून केवल कमजोरों पर लागू होता है और प्रभावशाली लोग इससे अछूते रहते हैं। अब देखना यह है कि क्या यह अभियान केवल कुछ लोगों तक सीमित रहेगा या फिर इस समस्या की जड़ तक जाकर बड़ी मछलियों पर भी शिकंजा कसा जाएगा।