हिन्दूओं पर धर्मांतरण का संकट
वर्षों तक भारतीय भूमि पर रहकर अपनी वैदिक धार्मिक संस्कृति को कायम रखते हुए हिंदू समुदाय ने कई विदेशी आक्रमणों का सामना किया। अक्सर यहां की संस्कृति बदली जाती थी। संस्कारी हिंदुओं को विभिन्न प्रलोभनों या मौत की धमकियों के माध्यम से बलपूर्वक धर्मांतरित किया गया। कुछ विचारधाराओं ने यहां की मिट्टी में जड़ें जमा लीं और बाद में अपना अलग धर्म बनकर उभरीं। यहां की मिट्टी में पली धार्मिक विचारधाराओं में हिंदुओं की सहिष्णुता की धार है। लेकिन आयातित धर्म अपने साथ कट्टरता, क्रूरता और धार्मिक विस्तारवाद लेकर आए। यहां की समृद्ध संस्कृति कभी-कभी बाहरी दबाव में आकर नीरस हो जाती थी। समय के साथ अनेक परिवर्तन हुए हैं। यवनों के धार्मिक उन्माद के विरुद्ध समय-समय पर यहाँ तलवारें टकराती रहीं। कभी छत्रपति के रूप में तो कभी म हाराणों के रूप में अनेक वीर धर्म की रक्षा के लिए इस धरती पर खड़े हुए। यह हिंदुओं की सहिष्णुता है जो हिंदुओं की जड़ों से उत्पन्न हुई है कि अन्य लोग भी हमारे जैसी ही पवित्रता की भावना विकसित करेंगे। बाहरी लोगों को इस धरती पर जड़ें जमाने की अनुम ति देना हिंदू समुदाय की वास्तविक गलती थी। हिन्दूओं की सहिष्णुता ही हिन्दूओं के खतरा साबित हुई।
धार्मिक विस्तारवादः
यदि हम पिछले पांच हजार वर्षों का इतिहास खंगालें तो भी ध्यान आएगा कि भारत के शासकों ने कभी भी अन्य धर्मों के क्षेत्र पर आक्रमण नहीं किया। अन्य धर्मों के लोगों को कभी भी हिंदू बनने के लिए मजबूर नहीं किया गया। हालाँकि, हिंदुओं पर ऐसे अत्याचार सदियों से होते आ रहे हैं। धर्म परिवर्तन के साथ ही यहां की मूर्तियां तोड़ दी गईं। मन्दिरों को नष्ट कर दिया गया। स्त्रियाँ भ्रष्ट हो गईं। यहां की संस्कृति को नष्ट कर दूसरों ने यहां अपनी संस्कृति स्थापित करने का प्रयास किया। दुर्भाग्य से यह प्रयास सफल भी हुआ। आजादी के बाद भी देश में धर्मनिरपेक्षता के बीज बोये गये, अन्य धार्मिक समुदायों को अल्पसंख्यक का दर्जा दिया गया। इतना ही नहीं, एग्लो इंडियंस नामक एक नए समुदाय को भी वैध और आरक्षित कर दिया गया। लेकिन इनमें से कुछ समुदाय धार्मिक विस्तारवाद की अपनाकर जानबूझकर अपनी जनसंख्या बढ़ाते रहे। जहां एक समुदाय ने जन्म दर बढ़ाना जारी रखा, वहीं दूसरे समुदाय ने हिंदू समुदाय की गरीब, आदिवासी जनजातियों को अपने धर्म में परिवर्तित करने की रणनीति तैयार की; जो देश के विभिन्न हिस्सों आज भी चल रहे हैं।
हिंदुओं के लिए खतरे की घंटीः
कभी लव जिहाद के नाम पर हिंदू लड़कियों का अपहरण करना तो कभी गरीबों और आदिवासियों का धर्म परिवर्तन कराकर संख्या बढ़ाना, ऐसे काम आए दिन हो रहे हैं। अब जिन इलाकों में आदिवासियों की आबादी है वहां जानबूझकर मिशन जोशुआ नाम से अभियान चलाकर आदिवासियों को बाइबिल सौंपी जा रही है। मंदिर की ओर जाने वाले कदम अब चर्च की ओर मोड़ दिये जा रहे है। ऐसे में सवाल है कि हिंदू सहिष्णुता का प्यारा गहना कब तक पहने रहेंगे। यदि धर्मांतरण का संकट केवल हिंदुओं पर आ रहा है तो सहना पड़ेगा यह सोचने की बात है। भले ही हिन्दूओं में सहिष्णुता है; लेकिन समय की मांग है कि प्रतिरोध की भावना पैदा की जाए। अन्यथा हिंदुस्तानी धरती पर किसी समय हिंदू कहलाने वाली कौम का अस्तित्व केवल इतिहास तक ही सीमित रह जाएगा। और इस के लिए आनेवाली पीढ़ीयां हमें माफ नहीं करेगी।