आतंकियों को सबक सिखाने का वक्त
मंगलवार 22 अप्रैल दोपहर को जम्मू कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमला हुआ और वापस एक बार फिर पुरा देश गुस्से से आग-बबूला हो गया। जम्मू-कश्मीर के शांत पहलगाम की वादियों में एक बार फिर आतंक ने अपने नापाक कदम रख दिए। पर्यटकों पर हमला हुआ। सिर्फ इसलिए कि वे एक खास धर्म के नहीं थे। यह हमला न केवल निर्दोष नागरिकों पर था, बल्कि भारत की सहिष्णुता, एकता और आत्मनिर्भरता पर भी था।
देश का नंदनवन कहे जानेवाले कश्मीर में हर साल लाखो पर्यटक घुमने जाते है। कश्मीर में पर्यटकों का सबसे पसंदीदा स्थान पहलगाम को कहा जाता है। पहलगाम की घाटीयाँ हर पर्यटक का मन लुभाती है। कश्मीर में 370 हटाने के बाद यहाँ पर घुमने जाने वाले पर्यटकों की संख्या में काफी वृद्धी देखी गयी। इसके चलते स्थानिकों को रोजगार भी मिलता जा रहा है। कश्मीरी इलाकों में खुशहाली का माहौल तैयार हो गया। लेकीन पाकव्याप्त कश्मीर में डेरा डाले आतंकीयों को ये बाते हजम नहीं हो रही थी। उनके 'आंका' यानी पाकिस्तानी सेना के अफसर उन्हें शस्त्रों के साथ सभी चिजे मुहैय्या कराते है। जिसके जरीए आतंकवादी अपनी नापाक हरकतों को अंजाम देते है। इस बार तो पर्यटकों पर धर्म पुछकर गोलीयां बरसाई गयी। जो भी लोग गैर-मुस्लीम थे, आतंकीयों की गोलीयां उनके शरीर के आरपार गयी।
कश्मीर की अर्थव्यवस्था पर्यटकों पर
कश्मीर की अर्थव्यवस्था, जो काफी हद तक पर्यटन पर निर्भर है, उन्हीं पर्यटकों के दम पर साँस लेती है। इन सैलानियों के आने से स्थानीय लोगों को रोजगार मिलता है, व्यापार चलता है, और घाटी की रौनक लौटती है। लेकिन यही विकास और शांति, आतंकियों की आँखों में चुभती है। इन आतंकियों को पाकिस्तान से लगातार समर्थन और शस्त्रों की आपूर्ति मिल रही है। पाक-व्याप्त कश्मीर में वे खुलेआम ट्रेनिंग कैंप चला रहे हैं, और भारत के भीतर अस्थिरता फैलाने की साजिशें रच रहे हैं।

अब समय आ गया है
अब समय आ गया है कि भारत इन नापाक मंसूबों को पूरी ताकत से कुचल दे। सिर्फ शब्दों से नहीं, बल्कि कठोर और निर्णायक कार्रवाई से। आतंक को पालने-पोसने वाले पाकिस्तान को भी यह स्पष्ट संदेश देना होगा कि भारत की सहनशीलता उसकी कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी ताकत है — और जब यह ताकत जागती है, तो दुश्मनों को कहीं पनाह नहीं मिलती। भारत सरकार को अब यह अवसर गंवाना नहीं चाहिए। यह न केवल देश की सुरक्षा के लिए आवश्यक है, बल्कि उन मासूम नागरिकों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी, जिन्होंने बिना किसी दोष के अपनी जान गंवाई। देश एकजुट है, आक्रोशित है, और अब निर्णय चाहता है — एक ऐसा निर्णय जो आने वाली पीढ़ियों को यह सिखाए कि भारत शांति चाहता है, लेकिन अपनी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करता। श्रीनगर में चल रही मिटिंग्स के जरिए वापस एक बार सर्जिकल स्ट्राइक या एअर स्ट्राइक की उम्मीद नहीं है। उम्मीद है तो बस आतंकियों को जड़ से खत्म करने कि। चीन के भीक पर पलते पाकिस्तान को उसकी औकात दिखाने की। उम्मीद है दोबारा पुलवामा या पहलगाम ना होने की...!