विश्व पुस्तक दिवस

 

हर वर्ष 23 अप्रैल को विश्व पुस्तक दिवस मनाया जाता है। इस दिन को मनाने की शुरुआत सन् 1995 में युनेस्को द्वारा की गई थी। इस तारीख का चयन इसलिए किया गया, क्योंकि इसी दिन विश्व के दो महान साहित्यकार — मिगुएल दे सर्वेंट्स और विलियम शेक्सपियर की मृत्यु हुई थी। इन दोनों ने साहित्य को नई दिशा दी और आज भी उनकी कृतियाँ पढ़ी और सराही जाती हैं।

यह दिन हमें पुस्तकों के महत्व और वाचन संस्कृति के संरक्षण की याद दिलाता है। एक पुस्तक सिर्फ काग़ज़ों का पुलिंदा नहीं होती — वह ज्ञान का सागर होती है, वह अनुभवों का संग्रह होती है, वह सोचने की दिशा बदल देती है।

हमारी भारतीय संस्कृति में भी पुस्तकों का बहुत ऊँचा स्थान है। हम पुस्तकों को 'सरस्वती' का रूप मानते हैं। प्राचीन ग्रंथ जैसे वेद, उपनिषद, रामायण, महाभारत आदि ने न केवल हमें धर्म, नीति और जीवन दर्शन सिखाया, बल्कि हमारी सभ्यता और संस्कृति की नींव भी रखी।

आज का युग तकनीक का युग है — स्मार्टफोन, लैपटॉप और टैबलेट के बीच किताबें कहीं गुम सी हो गई हैं। लेकिन सच तो यह है कि किताबें आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी पहले थीं। डिजिटल युग में भी किताबों की महत्ता कम नहीं हुई है, बल्कि ई-बुक्स और ऑडियो बुक्स ने तो पढ़ने को और आसान बना दिया है।

हमें यह दिन इस संकल्प के साथ मनाना चाहिए कि हम हर दिन पढ़ने की आदत डालें, और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें। बच्चों में किताबों के प्रति प्रेम जगाना, उन्हें ज्ञान की रोशनी देना — यह हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।

आइए, हम मिलकर वाचन संस्कृति को बढ़ावा दें, पुस्तकालयों का अधिक उपयोग करें और ज्ञान के इस अमूल्य भंडार को अगली पीढ़ियों तक पहुँचाएँ।

पढ़ना बंद मत कीजिए, क्योंकि एक किताब — आपकी सोच, आपका भविष्य, और यहाँ तक कि पूरी दुनिया भी बदल सकती है।